Breaking: Aravalli Mining पर रोक, अब नहीं मिलेगा नया Mining Lease

अब अरावली में नहीं होगी नई माइनिंग! सरकार का बड़ा फैसला, जानिए पूरी बात

अगर आप अरावली पहाड़ियों से जुड़े इलाकों में रहते हैं या पर्यावरण को लेकर चिंता करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत ज़रूरी है।

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सरकार ने आज अरावली पहाड़ियों में नए माइनिंग लाइसेंस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यानी अब अरावली में कोई नई खदान शुरू नहीं की जा सकेगी।

सरकार ने अचानक यह फैसला क्यों लिया?

दरअसल, हाल ही में अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को लेकर काफी विवाद चल रहा था। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा कि जब तक टिकाऊ खनन (सस्टेनेबल माइनिंग) की पूरी योजना तैयार नहीं हो जाती, तब तक नए माइनिंग लाइसेंस नहीं दिए जाने चाहिए।

अब उसी आदेश के बाद केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

क्या कहा पर्यावरण मंत्रालय ने?

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) ने कहा है कि यह फैसला दिल्ली से गुजरात तक फैली पूरी अरावली रेंज को अवैध खनन से बचाने के लिए लिया गया है।

सरकार ने सभी राज्यों को साफ निर्देश दे दिए हैं कि अरावली इलाके में अब कोई भी नया माइनिंग पट्टा नहीं दिया जाएगा।

यह रोक किन इलाकों में लागू होगी?

सरकार ने साफ किया है कि यह रोक पूरे अरावली इलाके पर एक जैसी लागू होगी। इसका मकसद पहाड़ियों की प्राकृतिक बनावट, जंगल और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है।

साथ ही बिना नियम-कानून के हो रहे खनन को पूरी तरह रोकना भी इस फैसले का बड़ा कारण है।

और कौन सा कदम उठाया गया है?

सरकार ने इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन (ICFRE) से कहा है कि वह पूरे अरावली क्षेत्र में ऐसे और इलाके ढूंढे, जहाँ खनन पूरी तरह बंद होना चाहिए।

यह फैसला पर्यावरण, भूगोल और इलाके की बनावट को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

जो खदानें पहले से चल रही हैं, उनका क्या?

सरकार ने यह भी साफ किया है कि जो खदानें अभी चल रही हैं, उन्हें तुरंत बंद नहीं किया गया है।

लेकिन राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे सभी पर्यावरण नियमों का सख्ती से पालन करें और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक ही काम करें।

पूरा मामला शुरू कैसे हुआ?

यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के 20 नवंबर के फैसले से जुड़ा है, जो TN गोडावर्मन बनाम भारत सरकार केस में आया था।

कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की एक समान वैज्ञानिक परिभाषा को मंजूरी दी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि जब तक सस्टेनेबल माइनिंग की पूरी योजना नहीं बन जाती, तब तक कोई नया माइनिंग लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।

अरावली इतनी ज़रूरी क्यों है?

सुप्रीम कोर्ट ने खुद माना है कि अरावली पहाड़ियाँ थार रेगिस्तान को फैलने से रोकने में हरी दीवार (ग्रीन बैरियर) की तरह काम करती हैं।

ये पहाड़ियाँ जैव विविधता, मौसम संतुलन और दिल्ली-एनसीआर में भूजल को बचाने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।

सोशल मीडिया पर क्यों मचा हंगामा?

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई। कुछ लोगों का कहना है कि पहाड़ियों की ऊँचाई के आधार पर तय की गई परिभाषा से अरावली का बड़ा हिस्सा खनन के लिए खुल सकता है।

पर्यावरण से जुड़े लोगों और विपक्षी दलों ने चेतावनी दी है कि छोटी पहाड़ियाँ भी पर्यावरण के लिए उतनी ही ज़रूरी हैं।

आख़िर में समझिए सीधी बात

अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पहाड़ी श्रृंखलाओं में से एक है, जो दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात तक फैली हुई है।

सरकार का यह फैसला साफ संकेत देता है कि अब अरावली में मनमाना खनन नहीं चलेगा और पर्यावरण की अनदेखी करना आसान नहीं होगा।

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